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तुम बैठे हो लेकिन जाते देख रहा हूँ...... :(

मैं भुल जाऊ तुम्हे अब यही मुनासिब है

न जाने क्या था, जो कहना था आज मिल के तुझे

इक ग़ज़ल उस पे लिखूँ दिल का तकाज़ा है बहुत

Maikade Bandh Kare

चांद से फूल से या मेरी ज़ुबाँ से सुनिए

If the word gets out, it will get to far off places,

अपने हाथों की लकीरों में बसा ले मुझको

कभी तो आसमाँ से चांद उतरे

हाँ मुझे प्यार है..... :)

यु तो गुजर रहा है