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आज मैंने अपना फिर सौदा किया

चांद से फूल से या मेरी ज़ुबाँ से सुनिए

ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो

अब अगर आओ तो जाने के लिए मत आना

सच ये है बेकार हमें ग़म होता है

तेरा चेहरा कितना सुहाना लगता हैं.......

वो दिल ही क्या तेरे मिलने की जो दुआ ना करे

तेरे आने की जब खबर महके

तुम को देखा तो ये ख़याल आया

मेरे दिल में तू ही तू है दिल की दवा क्या करूँ

फिर मन्दिर को कोई मीरा दीवानी दे मौला